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31 दिसंबर 2012




                                                                      
देश के हर नागरिक को गरिमामय जीवन बिताने का अधिकार है और बलपूर्वक या छलपूर्वक इस अधिकार का कोई हनन करे तो यह अन्याय है। इस अन्याय को रोका जा सके, ऐसी अपेक्षा रखना हम नागरिकों का अधिकार भी है और कर्तव्य भी।

इस देश के एक आम नागरिक की हैसियत से मैं प्रशासन, न्यायपालिका और कार्यपालिका से अपील करता हूँ कि स्वयंसिद्ध जघन्य बलात्कार के मामलों में फ़ास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाये और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये ताकि ऐसे कुकर्मों को रोका जा सके।

ब्लॉगर साथी श्री गिरिजेश राव द्वारा  इस विषय पर तैयार जनहित याचिका  का मैं भी समर्थन करता हूँ।

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इस विषय पर कोई सुझाव आपके पास है तो पांच जनवरी 2013 तक न्यायमूर्ति वर्मा की समिति को निसंकोच भेज सकते हैं।

ई मेल: justice.verma@nic.in
फैक्स: 011- 23092675

3 टिप्‍पणियां:

  1. अहिंसक और अपराध मुक्त समाज के लिए दुष्कृत्यों पर भयंकर भय स्थापित होना जरूरी है। पापभीरूता के बिना दुष्कृत्यों के प्रति पूर्ण अरूचि नहीं होती। त्वरित न्याय व्यवस्था, समाज में दुष्कर्मों के प्रति भय सर्जन का प्रमुख अंग है। इस प्रकार कठोर दंड, भय और बदनामी के साथ साथ सामान्य जन को विकारों और दुष्कर्मों से सजग व सावधान भी रखता है।

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  2. होली की हार्दिक शुभकामनायें!!!

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